परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी अपनी विदेश यात्रा के पश्चात आज पधारे। परमार्थ गुरूकुल के आचार्यो, ऋषिकुमारों और सेवकों ने पुष्पवर्षा, वेद मंत्र और शंख ध्वनि से दिव्य और भव्य अभिनन्दन किया।
आज अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वेदों के मंत्र पूरे विश्व को संजीवनी देने वाले मंत्र है। यजुर्वेद में बडा ही प्यारा मंत्र है ‘‘मित्रस्य चक्षुषा समीक्ष्यामहे’’, अर्थात् पूरे विश्व के साथ मित्रवत् व्यवहार करें। साथ ही धरती पर रहने वाले समस्त प्राणियों को अपनत्व की दृष्टि से...
Parmarth Niketan · Yoga For Vasudhaiva Kutumbakam- Pujya Swamiji
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस सारी सीमाओं को लांघते हुए योग के सार्वभौमिक रूप के दर्शन करता है। योग हमारे ऋषियों की हजारों वर्षों तक की अथक तपस्या का परिणाम हैं। ‘समत्वम् योग उच्यते’ अर्थात सुख-दुःख; सम और विषम दोनों परिस्थितियों में समान रहने का सूत्र देता है। योग जब जीवन में उतरता है तो जीव तर जाता है।
जब हम योग से जुड़ते हैं तो न केवल हम अपने शरीर, आत्मा और भावनाओं से जुड़ते हैं बल्कि हम विराट ब्रह्माण्ड और विराट सत्ता से...
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस सारी सीमाओं को लांघते हुए योग के सार्वभौमिक रूप के दर्शन करता है। योग हमारे ऋषियों की हजारों वर्षों तक की अथक तपस्या का परिणाम हैं। ‘समत्वम् योग उच्यते’ अर्थात सुख-दुःख; सम और विषम दोनों परिस्थितियों में समान रहने का सूत्र देता है। योग जब जीवन में उतरता है तो जीव तर जाता है।
जब हम योग से जुड़ते हैं तो न केवल हम अपने शरीर, आत्मा और भावनाओं से जुड़ते हैं बल्कि हम विराट ब्रह्माण्ड और विराट सत्ता से जुड़ जाते हैं और फिर न...
Pujya Swami ji while addressing the Youth-20 representatives who came for Parmarth Niketan Ganga Aarti and emphasised the timeless concept of 'Vasudhaiva Kutumbakam' in India. The aspiration for all beings to live happily and harmoniously is a profound message that resonates with the inclusive vision of India. The prayer "Aano Bhadra: Worship everyone, respect everyone, let everyone be happy, let everyone be disease-free, let everyone do auspicious deeds and let none suffer" reflects the compassionate spirit of Indian culture and philosophy. It acknowledges the interconnectedness of all life and expresses...
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूज्य स्वामीजी ने वैश्विक परिवार को संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति का चित्त जब शांत और स्थिर होता है "बुद्ध बने या ना बने शुद्ध बने"।
आज जीवन में बुद्धि तो बढ़ती जा रही है परन्तु शुद्धि खोती जा रही है और बुद्धि बढ़ती है तब जीवन में समृद्धि बढ़ती है परन्तु जब जीवन में शुद्धि बढ़ती है तो जीवन में सिद्धि बढ़ने लगती है। इसलिए अगर हम जीवन में बुद्ध नहीं बन सके तो शुद्ध तो बने। हमारा जीवन जब भीतर से स्थित...
ऋषिकेश, 20 फरवरी। आज के दिन को पूरे विश्व में ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना तथा गरीबी, लैंगिक असमानता, बेरोजगारी को दूर कर मानव अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देना। सामाजिक न्याय से तात्पर्य है कि सभी राष्ट्रों को शांतिपूर्ण सह.अस्तित्व और सतत विकास के लिये प्रकृति अनुकूल आवश्यक सूत्रों का पालन करना।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हिन्दू धर्म में न्याय दर्शन की अत्यन्त प्राचीन परम्परा रही है। वैदिक दर्शनों में षड्दर्शन...
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विविधता में एकता, समर्पण, प्रेम और त्याग का संदेश देते हुये कहा कि शिवपरिवार विविधता में एकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। शिव परिवार दर्शाता है कि भगवान शिव के गले में सर्प, गणेश जी का वाहन चूहा और कार्तिकेय जी का वाहन मोर है। वास्तव में सर्प, चूहे का भक्षण करता है और मोर, सर्प का परन्तु परस्पर विरोधी स्वभाव होते हुये भी शिव परिवार में अद्भुत प्रेम के दर्शन होते हैं। विचारों, प्रवृतियों और अभिरूचियों में विभिन्नता और विषमताओं के बावजूद शिवपरिवार...
On International Holocaust Remembrance Day, Pujya Swamiji passionately declares that "We are all Brothers and Sisters on this Earth. All people are equal. There are no small or big people, or superior or inferior people. When we can truly cultivate feelings of oneness in our heart, then and only then can we really begin working for lasting, unshakable harmony and peace in our families, in our communities and in the world."...
पूज्य स्वामी जी ने अंतरराष्ट्रीय मानव एकता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत, वसुधैव कुटुम्बकम्, बंधुत्व और सर्वे भवन्तु सुखिनः की संस्कृति जीता है। आईये सद्भाव और समरसता की संस्कृति को आगे बढ़ाये तथा स्थिरता, एकजुटता और एकता का जश्न मनाये।...
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य ने विश्व शान्ति और पर्यावरण संरक्षण हेतु परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने हवन कर विश्व शान्ति की प्रार्थना की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में पर्यावरण एक अहम विषय है। ग्लोबल वार्मिग, ग्रीनहाउस गैसों का प्रभाव, जैव विविधता संकट तथा प्रदूषण को नियंत्रित करना वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक हैं।
स्वामी जी ने कहा कि पर्यावरणीय संरक्षण के लिये वैश्विक स्तर कार्य कर रही संस्थायें और धार्मिक संगठनों की महत्वपूर्ण हैं क्योंकि विश्व...